Just some lines today :
अटक जाता है कभी
पाँव मे चुभे कांटे की तरह
सुई की नोक से कुरेदता हूँ
तो और चुभता है !
फिसल जाता है कभी
सांझ की धूप सा , आँगन के कोने से
पास जाता हूँ
तो और दूर जाता है !
सुलझाता हूँ तो उलझ जाता है
बुझाता हूँ तो सुलग जाता है
साँसों की बुनी चारपाई पे पसर जाता है !
ये वक्त है के कटता भी नहीं
ये वक्त है के थमता भी नहीं
ये वक्त इतना मतलबी क्यों है ?
Love
~Ami
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