Friday, April 22, 2011

WAQT

Just some lines today :

अटक जाता है कभी
पाँव मे चुभे कांटे की तरह
सुई की नोक से कुरेदता हूँ
तो और चुभता है !

फिसल जाता है कभी
सांझ की धूप सा , आँगन के कोने से
पास जाता हूँ
तो और दूर जाता है !

सुलझाता हूँ तो उलझ जाता है
बुझाता हूँ तो सुलग जाता है
साँसों की बुनी चारपाई पे पसर जाता है !

ये वक्त है के कटता भी नहीं
ये वक्त है के थमता भी नहीं
ये वक्त इतना मतलबी क्यों है ?

Love
~Ami